चार साहिबजादे की कहानी | Chote Sahibzade History In Hindi

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आज के आर्टिकल में हम आपको ऐसे इतिहास ( घटना ) से रूबरू कराने जा रहे हैं जो 1700 ईसवी में हुई थी और आज भी उसे याद किया जाता है तथा जब तक यह दुनिया रहेगी तब तक उसे याद किया जाएगा उस समय राजा महाराजाओं का समय चल रहा था यह एक ऐसी घटना थी जो रहती दुनिया तक याद की जाएगी जी हां दोस्तों आज हम आपको सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादे की कहानी बताने जा रहे हैं तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं

चार साहिबजादे की कहानी ( Chote Sahibzade History )

छोटे साहिबजादे सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटे थे गुरु साहिब के चार बेटे थे जिन्हें गुरु जी ने सिखों के लिए शहीद करवा दिया गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने दो बेटे युद्ध में शहीद करवाएं और दो बेटों को सरहिंद के नवाब ने जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया था गुरु गोबिंद सिंह जी के इस बलिदान को आज भी याद किया जाता है आज भी हर साल दिसंबर में साहिबजादो के शहीदी दिवस को बड़े मेले के रूप में मनाया जाता है यह मेला उनके शहीदी स्थान पर लगभग 7 से 8 दिन चलता है

चार साहिबजादे नाम इन हिंदी ( 4 Sahibzade Name And Age In Hindi )

  • जोरावर सिंह ( 9 साल )
  • फतेह सिंह  ( 7 साल )
  • अजीत सिंह ( 17 साल )
  • जुझार सिंह ( 13 साल )

गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार 1705 ईस्वी में 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक शहीद हो गया था यह ऐसी शहीदी बलिदान था जो ना तो उस समय से पहले ना ही उस समय के बाद और ना ही जब तक यह दुनिया रहेगी तब तक होगा गुरुजी ने सिखों तथा खलसे के लिए अपना पूरा परिवार 21 से 28 दिसंबर 1705 मे  इन 8 दिनों में बलिदान कर दिया था इन 8 दिनों का वर्णन हमने विस्तार पूर्वक नीचे किया है

  • गुरु गोविंद सिंह जी ने 21 दिसंबर 1705 ईस्वी में आनंदपुर का किला छोड़ा जिसे वर्तमान में आनंदपुर साहिब के नाम से जाना जाता है
  • 22 दिसंबर को गुरु जी का पूरा परिवार सरसा नदी पार करते समय बिछड़ गया यह नदी आज के समय में भी है
  • 23 दिसंबर को गुरु जी ने चमकौर की घड़ी में मुगलों aके साथ युद्ध लड़ा जिसमें उनके बड़े साहिबजादे अजीत सिंह तथा जुझार सिंह शहीद हो गए
  • 24 दिसंबर बीबी हरशरण कौर जी की शहीदी हुई इन्होंने बड़े साहिबजादो का अंतिम संस्कार किया था
  • 25, 26 तथा 27 दिसंबर तक माता गुजरी कथा छोटे साहिबजादो को ठंडे बुर्ज में कैद करके रखा गया
  • 28 दिसंबर को गुरु जी के छोटे साहिबजादो को जीवित ही दीवार में चुनवा दिया जाता है और इसी दिन माता गुजरी जी भी अपने प्राण त्याग देती है

इस तरह 1705 दिसंबर के महीने में गुरु गोबिंद सिंह जी के पूरे परिवार ने शहीदी प्राप्त की 

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4 Sahibzade Name And Age In Hindi
चार साहिबजादे नाम इन हिंदी

चार साहिबजादे बलिदान दिवस ( Chote Sahibzade Shaheedi Date )

दोस्तों भारत में हर साल 21 दिसंबर से लेकर 29 दिसंबर तक चार साहिबजादे का बलिदान दिवस मनाया जाता है स्पेशल पंजाब राज्य में बड़ी ही अच्छी तरीके से इसे मनाया जाता है इन 8 से 9 दिनों में पूरे पंजाब के हर शहर तथा गांव में अलग-अलग जगह पर लंगर लगाए जाते हैं पंजाब के सरहिंद शहर ( फतेहगढ़ साहिब ) तथा चमकौर साहिब में इन शहीदी दिनों में लाखों के हिसाब से लोग यहां माथा टेकने आते हैं चमकौर साहिब में बड़े साहिबजादो की शाहिदी हुई थी तथा फतेहगढ़ साहिब में छोटे साहिबजादो की शहीदी हुई थी

सरसा नदी पर बिछड़ने के बाद माता जी और छोटे साहिबजादो ने दूसरी रात कहां बिताई थी

सरसा नदी पर बिछड़ने के बाद दो छोटे साहिबजादे तथा माता गुजरी जी पानी के बहाव के साथ साथ चलते गए बहुत दूर चलने के बाद वह रास्ते में ही कुछ समय के लिए आराम करने लगे इस तरह आराम करते हुए वह चलते गए और सुबह से शाम हो गई तब वह उस समय सतलुज के किनारे पर एक छोटे से गांव चक टेरा में पहुंचे वहां पर माता गुजरी ने करीम बख्श नाम के व्यक्ति को अपने साथ होने वाली सारी बात बताई

करीम बख्श भी पहले एक हिंदू ही था पर मुगलों ने उसके ऊपर जोलम करके उसे भी मुसलमान बना दिया था जब करीम बख्श ने माताजी की पूरी बात सुनी तो उन्होने माता जी तथा छोटे साहबजादो के लिए बिस्तर लगाया इस तरह आप कह सकते हैं कि छोटे छोटे साहबजादो तथा माता गुजरी जी ने दूसरी रात चक टेरा नाम के एक गांव में बिताई

सूबे सरहंद वजीर खान ने माताजी और साहिबजादो को कैद करके कहां रखा था

25 दिसंबर 1705 ईस्वी को सरहिंद के नवाब वजीर खान ने माता गुजरी जी तथा छोटे साहिबजादो फतेह सिंह और जुझार सिंह को पकड़ लिया फिर 25, 26, 27 दिसंबर को उन्हें ठंडे बुर्ज में रखा गया जो आज भी फतेहगढ़ साहिब में है और रहती दुनिया तक रहेगा 25, 26, 27 दिसंबर तक वजीर खान ने छोटे साहिबजादो को बहुत से लालच दिए डराया पर छोटे साहिबजादो ने उसकी एक ना सुनी तथा 28 दिसंबर को माताजी और फतेह सिंह ,जुझार सिंह साहिबजादो ने शहीदी को प्राप्त किया उस समय आज के समय से कई गुना ज्यादा ठंड हुआ करती थी ऊपर से ठंडे बुर्ज चारों तरफ से खुला था और ठंडी हवाएं उनके शरीर को चीरती हुई निकलती होंगी

तो दोस्तों यह थी Chote Sahibzade History जो कभी भी भुलाई नहीं जा सकती अगर आपको हमारे इस आर्टिकल में कुछ गलतियां यहां कोई जानकारी और चाहिए तो आप हमें ईमेल द्वारा संपर्क कर सकते हैं आप हमें कमेंट करके बताएं कि आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा

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चार साहिबजादे बलिदान दिवस

हर साल 21 से 28 दिसंबर तक

छोटे साहिबजादे का क्या नाम था

फतेह सिंह ( आयु 7 साल )
जोरावर सिंह ( आयु 13 साल )

सबसे बड़ा साहिबजादा कौन था

अजीत सिंह सबसे बड़ा साहिबजादा था जिनकी उम्र 17 वर्ष की थी

साहिबजादो की मृत्यु कब हुई थी

23 दिसम्बर 1705 ईसवी में दो बड़े साहिबजादो की मृत्यु हुई
28 दिसम्बर 1705 ईसवी में दो छोटे साहिबजादो की मृत्यु हुई

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